26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने की इजाजत नहीं मिली


आप के लोकप्रिय अखबार व मिडिया के माध्यम से विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि इस बार के 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में देश की पहली रक्षा पंक्ति 'बीएसएफ' व एसएसबी को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने की इजाजत नहीं मिल । जबकि देश की हजारों कि.मि. लम्बी पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल व भूटान से सटी सर्द सरहदों की चाक चौबंद चौकिदारी उपरोक्त सुरक्षा बल कर रहे हैं । काश्मीर घाटी व नक्सल प्रभावित राज्यों में दहशतगर्दों ओर नक्सलवादियों से लोहा लेने की बात करें या फिर देश में अचानक आये बाढ-भुकम्प जैसी प्राकृतिक विपदाओं से आम जनता की जान माल की सुरक्षा या राज्यों की सरकारों को कानून व्यवस्था व शांति स्थापित करने में विशेष योगदान हो या फिर चुनाव कराने में इन बलों की निष्पक्ष भुमिका को नकारा नहीं जा सकता।


  रणबीर सिंह के नेतृत्व में पुर्व अर्धसेनिकों के डेलिगेशन ने डीजीपी बीएसएफ श्री वीके जौहरी से मुलाकात कर रोष व्यक्त किया कि 2 लाख 75 हजार जवानों से सुसज्जित बीएसएफ दुनिया की एकमात्र ऐसी पहली रक्षापंक्ति फोर्स जिस के पास अपना तोप खाना, एयर विंग व मैरीन विंग हों और उस को 15 मिनट के लिए राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का मौका ना मिले इस से बड़ा देश के लिए दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।अक्सर देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले बीएसएफ ,व एसएसबी के शहीद जवानों की शौर्यपूर्ण वीरगाथाओं का राजपथ से इस बार वर्णन कौन करेगा। यही एक अविस्मरणीय लम्हा होता है जब सुरक्षा बलों की टोलियां अपने गाजे-बाजे के साथ राजपथ पर से गुजरते हैं साथ ही इन वीरों की बहादुरी की शौर्य गाथाओं का बखान कर सर्वोच्च अलंकरणों से सम्मानित किया जाता है। 


तारादत्त शर्मा कार्डिनेटर उत्तराखंड ने कहा कि अकेले ऐसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी हैं जो अक्सर बीएसएफ आईटीबीपी जवानों  के साथ गुरेज सैक्टर नं सरहदों पर दिवाली मनाते हैं । यशस्वी प्रधानमंत्री जी को सल्यूट ओर सलाम लेकिन आज 15 हजार किलोमीटर लम्बे बार्डर की सुरक्षा करने वाले चौकिदारों को राजपथ से बाहर कर देना जिस के चलते इन अर्धसेनिकों में काफी मायूसी है । पहले सरकार ने हमारे अर्ध सैनिक बलों की पैंसन बंद की और अब राजपथ से गुजरना भी नागवार गुजरा। ये भेदभाव का सिलसिला 2016 से शुरू हुआ जब परेड दो घंटे समय अवधि को सिमटा कर मात्र 92 मिनट कर दिया। ऐसा पहली बार जब फ्रांस से आये विदेशी दस्ते राजपथ पर कदमताल करते दिखे जबकि अर्धसेनिक बलों के जवानों को लुटियंस जोन की बाहरी सुरक्षा में तैनात कर दिया गया । ये भेदभाव का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। पिछले साल ही गणतंत्र दिवस परेड पर सीआईएसएफ दस्ते , जो कि अपनी स्वर्ण जयंती समारोह मना रहे थे , एन मौके पर रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुमति नहीं दी गई जिससे फोर्सेस जवानों के मौराल पर असर पड़ना लाजमी ।


कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस वैलफेयर एसोसिएशन के संयोजक  मध्यप्रदेश श्री जयेंद्र राणा ने डीजीपी बीएसएफ से सख्त ऐतराज जताया कि राजपथ पर ऊंट हाथी घोड़े यहां तक कि डॉग स्क्वायड तो गुजर सकतें हैं फिर बीएसएफ व एसएसबी का दस्ता क्यों नहीं ? हम देश के लाखों पुर्व अर्धसेनिक बलों के परिवार रक्षा मंत्रालय के तुगलकी फरमान का घोर विरोध करते हैं ।
   उम्मीद की प्रधानमंत्री जी परेड समय अवधि को पहले की तरह बढ़ा कर 120 मिनट कर ,उपरोक्त सुरक्षा बलों के दस्तों को राजपथ परेड में भाग लेने का आदेश जारी करेंगे ताकि उपरोक्त अर्धसेनिक बलों के जवान भी सीना तान कर गाजे बाजे के साथ राजपथ परेड में शामिल हो कर अपने राष्ट्र व फोर्सेस का नाम गर्व से ऊंचा कर सकें।


जयेंद्र सिंह राणा
संयोजक
कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस वैलफेयर एसोसिएशन
ग्वालियर, मध्यप्रदेश